बरेली में सपा नेता के मैरिज हॉल को ढहाने पर रोक; इलाहाबाद हाईकोर्ट ने BDA को दिया ये आदेश !

बरेली
कोर्ट ने कहा- अंतरिम आदेश की अवधि के दौरान संबंधित संपत्ति की रक्षा के लिए पक्षकार यथास्थिति बनाए रखेंगे.
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली में सपा नेता के बैंक्वेट हॉल ऐवाने-ए-फरहत का ढांचा गिराने से बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) को मना किया है. कोर्ट ने मैरेज हॉल पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति महेशचंद्र त्रिपाठी एवं न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने सपा नेता सरफराज वली खान और उनकी पत्नी फरहत जहां की याचिका पर दिया है. कोर्ट ने याचियों को अनधिकृत निर्माण के नियमितीकरण और कंपाउंडिंग के आवेदन के साथ बीडीए उपाध्यक्ष से संपर्क करने की स्वतंत्रता दी है. सुप्रीम कोर्ट ने सपा नेता की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर उन्हें हाईकोर्ट जाने की छूट दी थी. गत चार दिसंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका निस्तारित करते हुए कहा था कि गिराने की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है और आंशिक विध्वंस किया जा चुका है.
सुप्रीम कोर्ट ने एक सप्ताह के लिए अंतरिम सुरक्षा प्रदान करते हुए निर्देश दिया था कि 10 दिसंबर तक यथास्थिति बनाए रखी जाए. हाईकोर्ट में याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशि नंदन ने तर्क दिया कि विध्वंस की कार्रवाई 12 अक्टूबर 2011 के आदेश की आड़ में की जा रही है, जो याचियों को कभी तामील नहीं कराया गया था. याचियों की ओर से कहा गया कि अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन और विकास अधिनियम 1973 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना सीधे ध्वस्तीकरण की कार्यवाही शुरू कर दी. याचियों ने 1973 के अधिनियम के तहत उपलब्ध प्रावधानों का सहारा लेते हुए कहा कि निर्माण का विवादित एरिया कंम्पाउंडेबल है।
दूसरी ओर, बीडीए की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक मेहता ने याचिका का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि याचियों ने महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए हैं. उन्होंने कहा कि स्वीकृत मानचित्र के बिना मैरेज हॉल के निर्माण के संबंध में 1973 अधिनियम की धारा 27(1) के तहत 2011 में ही नोटिस जारी किए गए थे. यह बताया कि मई और अक्टूबर 2011 के बीच कई अवसर दिए जाने के बावजूद याची न तो उपस्थित हुए और न ही साक्ष्य प्रस्तुत किए. परिणामस्वरूप 12 अक्टूबर 2011 को ध्वस्तीकरण का आदेश किया गया. बीडीए ने कहा कि 2011 का आदेश अधिनियम की धारा 27(2) के तहत अपील योग्य था जो वैधानिक उपाय है और याची इसका उपयोग करने में विफल रहे।
कोर्ट ने याचियों को दो सप्ताह के भीतर बरेली विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के समक्ष आवेदन दाखिल करने का निर्देश दिया है और बीडीए उपाध्यक्ष को आवेदन तय करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा कि आवेदनों पर विचार करने और उनका निस्तारण करने की पूरी प्रक्रिया विकास प्राधिकरण द्वारा स्वतंत्र रूप से और निष्पक्ष रूप से की जाएगी।
कोर्ट ने कहा कि अंतरिम आदेश की अवधि के दौरान संबंधित संपत्ति की रक्षा के लिए पक्षकार यथास्थिति बनाए रखेंगे तथा आवेदनों के निपटारे तक कुछ और नहीं ढहाया जाएगा. कोर्ट ने याचियों को उस स्थल पर किसी भी प्रकार का आगे का विकास निर्माण या परिवर्तन करने से रोक दिया है।






