उत्तर प्रदेश

बीआर कंपलेक्स में परशुराम जयंती पर कवि सम्मेलन में श्रोतागण मंत्र मुग्ध हुए

जीटी 7 डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क टीम औरैया, कानपुर मंडल ब्यूरो रिपोर्ट, राम प्रकाश शर्मा।*                                                           *औरैया 20 अप्रैल।*  स्थानीय संजय गेट के समीप बीआर कंपलेक्स में भगवान परशुराम की जयंती पर सामाजिक समरसता एवं एकजुटता का ध्यान रखते हुए बेंगलुरु निवासी कार्यक्रम आयोजक बाल किशन गुप्त एवं रामविलास गुप्त द्वारा आयोजित कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ रेनू चंद्रा उरई, व अध्यक्ष डॉ अंजनेय सहाय अवस्थी पूर्व प्रधानाचार्य तिलक इंटर कॉलेज एवं अन्य गणमान्य द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलन किया गया।                                            .  कार्यक्रम का शुभारंभ मां वीणा वादिनी की वंदना कर वरिष्ठ कवित्री एवं प्रधानाचार्य गीता चतुर्वेदी भारतीय बालिका इंटर कॉलेज द्वारा दिया गया। भगवान परशुराम जयंती पर आयोजित कवि सम्मेलन में मुख्य रूप से वरिष्ठ कवि डॉ गुरु प्रताप गुरु ने सामयिक हालातों पर बच्चों की जीवन शैली को ध्यान में रखते हुए अपनी रचना में कहा जहां पर छोटे बच्चे कुछ शैतान होते हैं, वहां जज्बात के लम्हें भी आलीशान होते हैं। साहित्य के क्षेत्र में शहर औरैया ही नहीं बल्कि जनपद की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त अजय अंजाम ने सामयिक हालातों पर भगवान परशुराम का चित्रण करते हुए अपनी रचना में कहा कि फरसा बोला केदारनाथ, जय अमरनाथ जय चंद्रभाल।फरसा घूमा तो फरसे से निकला जय जय जय महाकाल। कार्यक्रम की रोचकता एवं श्रोताओं की विशिष्टता को ध्यान में रखते हुए जज्बाती कवि डॉ मिथुन मिश्र ने प्रकृति विरुद्ध जीने वालों को ही नहीं बल्कि निरंकुशता की हद पार कर रहे लोगों को आगाह करते हुए कहा… अब नहीं लगता इस दुनियां में आगे कुछ भी अच्छा है। स्वान के बच्चे गोद में सोएं रोता गाय का बच्छा है। वहीं भगवान परशुराम को याद करते हुए डॉ गोविंद द्विवेदी ने अपनी रचना पढ़ी अत्याचारों पर क्रोधनल जब कुठार बन जाता है। शास्त्र, शास्त्र व संयम जब, युग सुधार बन जाता है।                                                    . कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ अंजनेय सहाय अवस्थी ने जीवन को जीवंतता से कैसे जिया जाए जैसी तमाम युक्तियों को ज्ञात कराते जीने की सलाह दी। उरई से पधारी कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ रेनू चंद्रा ने अपनी भावनाओं को व्यक्त कर कहा दुआ मांगे चलो सच्चे हृदय से, सभी को हो मयस्सर खिलखिलाहट।
, वरिष्ठ कवित्री एवं प्रधानाचार्य गीता चतुर्वेदी ने श्रोताओं को मंत्र मुग्ध करते हुए गीतों की बौछार कर देर कहां लगती लोगो, दिल पहलू से जाने में। इसी क्रम में कवित्री शर्मिष्ठा गुप्ता ने अपनी रचना में कहा सिद्धियां पाने वाला जरूरी नहीं बुद्ध हो, हिरणाकश्यप और रावण भी हो सकता है। कार्यक्रम का सफल संचालन एवं अपने अंदाज से गुदगुदाने वाले कृष्ण कुमार कृष्णा ने कहा उजाले की दगाबाजी से वाकिफ हो गया हूं मैं, तभी तो ढूंढता हूं अब अंधियारी आशियाने को। वहीं गीत और गजलों की अदायगी के अंदाज में अयाज अहमद ने परमात्मा को याद करते हुए कहां देर कहां लगती लोगों, दिल पहलू से जाने में। वहीं कार्यक्रम में मुख्य रूप से वरिष्ठ कवि अनिरुद्ध त्रिपाठी एडवोकेट, गजल कार विवेक राजपूत बेदर्द, एवं ललित तिवारी, सहित आध्या चतुर्वेदी, ज्ञान सक्सेना ने अपनी अपनी रचनाओं को पढ़कर देर रात तक श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर सुनने को विवश किया। कवि सम्मेलन में मुख्य रूप से प्रेम नारायण गुप्त, भीमसेन सक्सेना, शेखर गुप्ता, दिलीप सोनी के अलावा एक सैकड़ा के करीब श्रोता गण उपस्थित रहे। द्वारा रिपोर्ट वरिष्ठ कवि डॉ मिथुन मिश्र 20 अप्रैल सन 2026 विनम्रता के साथ आपके समक्ष संबंधित विवरण प्रेषित है।

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