उत्तर प्रदेश

संघ के 100 साल: जब RSS का साथ छोड़कर चुपचाप चले गए थे गुरु गोलवलकर

संघ का राष्ट्र निर्माण!


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गुरु गोलवलकर अध्यात्म और राष्ट्र निर्माण को साथ-साथ लेकर चलते थे. यही वजह रही कि उनकी जीवन यात्रा में एक समय ऐसा आया जब वो सार्वजनिक जीवन को छोड़कर नागपुर से मीलों दूर बंगाल के रामकृष्ण आश्रम में आ गए. एक स्वामी की सेवा करने. ये वही समय है जब डॉ हेडगेवार संघ का नेतृत्व सौंपने के लिए एक ऊर्जावान और चरित्रवान शख्सियत खोज रहे थे. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है यही कहानी.
समाजसेवा के अलावा माधव सदाशिव गोलवलकर का एक आध्यात्मिक पक्ष भी था. वो लगातार नागपुर के रामकृष्ण मिशन में आते-जाते रहते थे. 1936 में माधव बीमार स्वामी अखंडानंद की देखभाल करने के लिए बंगाल में रामकृष्ण मिशन के सरगाची आश्रम के लिए निकल गए. फिर करीब 2 साल का उनका समय वहीं कटा. स्वामी जी से उन्होंने संन्यास की दीक्षा भी ली और उनकी मृत्यु के 2 महीने बाद तक वहीं रुके रहे. उन्होंने फिर से 1938 में नागपुर वापसी की.

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