मथुरा में भगवान का मनाया गया विवाहोत्सव:जोधपुर के भक्तों ने वृंदावन में निकाली भगवान की बारात

गोपाल चतुर्वेदी
ग्लोबल टाईम्स 7 न्यूज नेटवर्क
मथुरा
भगवान राधा कृष्ण के प्रेम की भूमि वृंदावन यहां भक्त भगवान के अलग अलग तरह के आयोजन कर उनकी आराधना करते हैं। ऐसा ही एक अनोखा आयोजन जोधपुर के भक्तों ने किया। जोधपुर से आए संत राधा कृष्ण महाराज के नेतृत्व में भक्तों ने यहां भगवान की बारात निकाली। शहर की सड़कों पर होकर निकली भगवान की इस बारात को देख हर श्रद्धालु धन्य हो गया।
जोधपुर के रहने वाले संत राधा कृष्ण महाराज पिछले 8 वर्षों से रस महोत्सव का आयोजन कर रहे हैं। 2013 में शुरू हुआ यह आयोजन दो वर्ष कोरोना काल के कारण सम्पन्न नहीं हुआ। अलग अलग तीर्थों पर होने वाले इस रस महोत्सव में भगवान के विभिन्न उत्सव आयोजित किए जाते हैं।
रस महोत्सव के पांचवें दिन विवाह उत्सव का आयोजन किया गया। इस उत्सव में भगवान की भव्य बारात निकाली गई। रंगनाथ मंदिर के बड़े बगीचा से शुरू हुई बारात शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए रंगनाथ मंदिर परिसर में पहुंची। जहां भगवान की बारात का स्वागत किया गया।
जोधपुर के रहने वाले संत राधा कृष्ण महाराज ने बताया कि उनके प्रभु गोपाल जी अकेले थे। 2013 में लगा कि अब भगवान का विवाह होना चाहिए। उसी समय वृंदावन में पहला रस महोत्सव मनाया गया। यहीं उनके गोपाल जी को राधा रानी मिली। जिसके बाद संपन्न हुआ विवाह उत्सव।
भगवान की बारात जब शहर की सड़कों पर निकली देखने वाले अचंभित हो गए। भगवान राधा गोपाल की बारात में मिनी भारत की झलक देखने को मिली। बारात में उड़ीसा,तेलंगाना,कोलकाता,राजस्थान के कलाकार यहां विभिन्न प्रदर्शन कर रहे थे तो देश के अलग अलग राज्यों से आए हजारों भक्त नाचते गाते चल रहे थे।
भगवान की बारात शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए रंगनाथ मंदिर पहुंची। यहां मंदिर के मंडप बारहद्वारी पर भगवान का स्वागत किया गया। मंदिर के पुजारियों ने भगवान को चंदन लगाया और प्रसाद अर्पित किया। साथ चल रहे साधु संतों का पटका पहनाकर स्वागत किया गया। इसके बाद बारात हजारीमल सोमानी इंटर कॉलेज के खेल मैदान में बने कथा पंडाल के लिए प्रस्थान कर गई।
भगवान की बारात में संत राजेंद्र दास महाराज,पुंडरीक गोस्वामी, अनघा श्रीनिवासन, एस पी तोशीवाल,मनोज ,अरुण तापड़िया, ब्रजेश महाराज ,वैभव सिद्ध,पिंकी अग्रवाल सहित हजारों भक्त उपस्थित रहे। बारात के कथा पंडाल पहुंचने पर भक्तों ने भगवान के दर्शन किए इसके बाद उनको प्रसाद अर्पित किया गया। रस महोत्सव का समापन 1 जनवरी को होगा।






