अच्छे कर्मों से मिलती है मानव योनि में जन्म

सत्कर्म , धर्म, पूजा पाठ से प्रभु होते हैं प्रसन्न
भक्तो की पुकार पर नंगे पांव दौड़ कर आते हैं प्रभु
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विकास अवस्थी
दिबियापुर
जिस प्रकार से तोता जिस फल में चोंच लगा देता है।वह फल अवश्य ही मीठा हो जाता है।इस भागवत कथा में शुकदेव जी ने रस ही रस भर दिया है।हमारे सत्कर्म का हिसाब बराबर होता है।सर्प कभी अपना मकान नहीं बनता ,हमेशा ही चूहे के बिल को अपना घर ही मानता है।आजकल प्रभु कथा जिसने कभी नहीं सुनी ,उनका उद्धार कैसे होगा? उनके कानों को केवल निंदा ही पसंद है
भागवत पुराण जीने की कला प्रतिभा सिखाती हैं मानव सत्कर्म से आता है निखार
मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाती है श्रीमद्भागवत कथा। लोग निन्दा करें तो करने दो। प्रशंसा में तो मनुष्य फंस सकता है। निन्दा में पाप नष्ट होते हैं। कोई झूठी निन्दा करें तो चुप रहो। सफाई मत दो। सत्य की सफाई देना सत्य का निरादर है। यह बातें श्री राणा नगर दिबियापुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस में परम् पूज्य श्री आशीष शुक्ल जी महाराज ने अपने श्री मुखारविंद से बताई।

महाराज श्री ने कहा कि परिवार के सभी सदस्य प्रतिदिन प्रातः काल उठने के साथ ही वृद्ध माता-पिता, दादा-दादी तथा अपने से बड़ों के चरण -स्पर्श करते हुए नमन करें। बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलने से सुख शांति का वातावरण बना रहता है। संतसंग में जाने से पाप नष्ट होता है। महाराज श्री आगे बताया कि जब आप सत्संग में जाने के लिए तैयार होते हैं तो आपको सत्संग के मार्ग में अनेक बाधाएं एवं अनेक कष्ट तथा अनेक रूकावटे उत्पन्न होती है किन्तु जिन लोगो के ऊपर गुरु कृपा होती है उनके लिए सारे मार्ग सुगम हो जाते है और वो बिना किसी कठिनाई अथवा बाधा के सभी मार्गों को पार करके प्रभु को प्राप्त कर लेते है। बिना गुरु कृपा के इस मानव जीवन का उद्धार होना असम्भव है क्योंकि
गुरु बिन भवनिधि तरही की कोई।
जौं बिरंची संकर सम होई।।






