ध्रुव चरित्र सुन भाव विभोर हुए श्रोता

ग्लोबल टाईम्स 7 डिजिटल न्यूज नेटवर्क औरैया समाचार संपादक डॉ धर्मेन्द्र गुप्ता।
कंचौसी कस्बा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक ने ध्रुव चरित्र और सती चरित्र का प्रसंग सुनाया। श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार को कथा वाचक आचार्य मनोज अवस्थी ने कहा कि भगवान शिव की अनुमति लिए बिना उमा अपने पिता दक्ष के यहां आयोजित यज्ञ में पहुंच गईं। यज्ञ में भगवान शिव को निमंत्रण नहीं दिए जाने से कुपित होकर सती ने यज्ञ कुंड में आहुति देकर शरीर त्याग दिया। इससे नाराज शिव के गणों ने राजा दक्ष का यज्ञ विध्वंस कर दिया। इसलिए जहां सम्मान न मिले वहां कदापि नही जाना चाहिए। ध्रुव कथा प्रसंग में बताया कि सौतेली मां से अपमानित होकर बालक ध्रुव कठोर तपस्या के लिए जंगल को चल पड़े। बारिश, आंधी-तूफान के बावजूद तपस्या से न डिगने पर भगवान प्रगट हुए और उन्हें अटल पदवी प्रदान की। ऋषभ देव ने कथा सुनाते हुए कहा कि वह अपने पुत्रों को गोविंद का भजन करने का उपदेश देकर तपस्या को वन चले गए। भरत को हिरनी के बच्चे से अत्यंत मोह हो गया। नतीजे में उन्हें मृग योनि में जन्म लेना पड़ा।भागवत कथा में गिरजा शंकर त्रिवेदी, उमाशंकर त्रिवेदी,मुन्ना पोरवाल, अभय गुप्ता, सुड्डू यादव सहित तमाम श्रोता मौजूद रहे।