उत्तर प्रदेशलखनऊ

तीसरे दिन भी जारी रहा मौन आमरण अनशन !

आमरण अनशन पर बैठे समाजसेवी श्री कृष्ण पिछड़ा

विकास अवस्थी के साथ
फोटो समाचार

अनशन पर बैठे
समाजसेवी पिछड़ा व उनके साथ अन्य नगर वासी

दिबियापुर औरैया

5 सितंबर शिक्षक दिवस से अपनी पुरानी मांगों को लेकर रेल प्रांगण में बैठे समाजसेवी श्री कृष्ण पिछड़ा ने रेल मंत्रालय सहित प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री एवं रेल प्रबंधक इलाहाबाद सहित सभी को लिखित शिकायत करते हुए अवगत कराया था। कि फफूंद रेलवे स्टेशन दिल्ली हावड़ा रूट पर जनपद औरैया का एकमात्र रेलवे स्टेशन है।जहां पर औरैया जनपद कन्नौज जनपद कानपुर देहात एवं अन्य जनपदों से यात्रीगण आकर अपने गंतव्य को जाने के लिए रेल का सहारा लेते हैं फफूंद रेलवे स्टेशन प्रथम श्रेणी का रेलवे स्टेशन है। जिसकी आए करीब ₹13 करोड़ हुआ करती थी।लेकिन कोरोनावायरस के कारण रुकने वाली जम्मू तवी एक्सप्रेस, उद्यान आभा तूफान एक्सप्रेस, देहरादून जाने वाली लिंक एक्सप्रेस पैसेंजर गाड़ियां एवं कानपुर से फफूंद वाली पैसेंजर गाड़ी को भी हटा कर इटावा कर दिया है। जबकि इटावा से आगरा जाने वाली गाड़ी को लिखित तौर पर कहा गया था कि वह फफूंद रेलवे स्टेशन से सुचारू रूप से चलाई जाएगी। पिछले दिनों रेल मंडल अधिकारी ने यह भी आश्वासन दिया था कि जोधपुर हावड़ा,मरुधर एवं अन्य सुपरफास्ट एक्सप्रेस फफूंद रेलवे स्टेशन पर रोकी जाएगी लेकिन वह गाड़ियां नही रोकी गई। और रुकने वाली मुरी एक्सप्रेस, लिंक एक्सप्रेस तूफान एक्सप्रेस एवं पैसेंजर गाड़ियों को बंद करके यात्रियों के लिए एक बड़ा आघात किया है।जिसके कारण यात्री बहुत परेशान होकर अपने गंतव्य को जाते हैं। इन्हीं मांगों को लेकर दिबियापुर फफूद रेलवे स्टेशन पर 3 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे समाजसेवी श्री किशन पिछड़ा ने मांग की है कि हमारी पुरानी ट्रेनों को विधिवत रोका जाए और नई ट्रेनों का ठहराव चालू किया जाए जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होगी तब तक हम अपने मंसूबों को पूर्ण होने तक आमरण अनशन पर बैठे रहेंगे अगर जिला प्रशासन एवं रेल प्रशासन ने हमारी मांगों को नहीं माना तो हम अपना दम भी तोड़ देंगे जिसकी जिम्मेदारी संपूर्ण जिला प्रशासन और रेल प्रशासन की होगी वही प्रतिनिधि उद्योग व्यापार मंडल, उद्योग व्यापार मंडल सहित अन्य समाजसेवी संगठनों ने भी अपना समर्थन समाजसेवी श्री कृष्ण पिछड़ा को दिया है और अनवरत उनकी देखभाल और उनके साथ खड़े होकर सही और जायज मांगों को रेल प्रशासन को मनाने के लिए बाध्य करेंगे तथा अगर रेल प्रशासन नहीं माना तो एक बड़ा आंदोलन भी किया जाएगा जिसकी जिम्मेदार रेल प्रशासन स्वयं होगा।उक्त बातें गांधीवादी समाजसेवी श्री कृष्ण पिछड़ा ने कही

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