उत्तर प्रदेश

हाईकोर्ट ने विद्युत विभाग पर 25 हजार रुपए जुर्माना लगाया

गलती के लिए दोषी कर्मी से रुपए बसूलने का भी दिया आदेश

विभागीय चूक के चलते उपभोक्ता हुआ परेशान

जीटी-7, डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क कानपुर मंडलब्यूरो रिपोर्ट, रामप्रकाश शर्मा
08 फरबरी 2024

#औरैया।

विभागीय लापरवाही के कारण एक विद्युत उपभोक्ता को हुई परेशानी पर उच्च न्यायालय प्रयागराज ने पीड़ित की याचिका की सुनवाई करते हुए विद्युत विभाग पर 25 हजार रुपए अर्थदंड लगाया तथा इस धनराशि को प्रताड़ित किये हुए उपभोक्ता को अदा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने उपभोक्ता के विरूद्ध लिखाई गई एफआईआर, चार्जशीट व संबंधित अदालत में चल रही प्रक्रिया को भी निरस्त कर दिया। अधिकारियों से इस लापरवाही के लिए दोषी कर्मी का पता लगाकर उससे उक्त अर्थदंड की बसूली का भी आदेश दिया।
वरिष्ठ अधिवक्ता महावीर शर्मा के अनुसार यह मामला शहर के पढ़ीन दरवाजा मोहल्ला निवासी विद्युत उपभोक्ता रामशंकर यादव द्वारा उच्च न्यायालय में दायर याचिका से संबंधित है। याची के विरूद्ध विद्युत विभाग ने एक एफआईआर कोतवाली में दिनांक 22 दिसम्बर 2017 को विद्युत अधिनियम का पंजीकृत कराते हुए उस पर बिल बकाया जमा न करने व इसी कारण एक सप्ताह पहले कनेक्शन अस्थाई रूप से विच्छेदित करने के बावजूद उसे कटिया डालकर प्रयोग करने का आरोप लगाया गया। इस रिपोर्ट पर पुलिस ने चार्जशीट लग दी व यादवी पर कोर्ट में मुकदमा भी चलने लगा। न्यायालय में उपस्थित न होने पर उसके विरूद्ध गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। इस कार्यवाही को लेकर पीड़ित उपभोक्ता रामशंकर यादव ने हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत की। उसके हाईकोर्ट के अधिवक्ता के डी अवस्थी ने कोर्ट को बताया कि याची का घरेलू विद्युत कनेक्शन दो वर्ष पहले 9 दिसम्बर 2015 को स्थाई रूप से विभाग ने जब विच्छेदित कर पीडी प्रमाण पत्र जारी कर दिया था, तो विभाग ने एफआईआर में उसे 15 दिसम्बर 2017 को बकाया जमा न करने पर अस्थाई रूप से काटने की बात कैसे दर्शाई। उन्होंने दो वर्ष पहले विभाग द्वारा उक्त कनेक्शन के पीडी प्रमाण पत्र को प्रस्तुत किया जो कि तत्कालीन एसडीओ द्वारा जारी हुआ था। अधिवक्ता ने सफाई दी कि जिस कनेक्शन के कटे हुए दो वर्ष बीत गये, उस पर बकाया निकालने व अस्थाई रूप से काटे जाने की बात कहीं भी फिट नहीं बैठती। कोर्ट ने विभाग के वकीलों से जब जबाव मांगा तो विभाग को अपनी गलती का एहसास हो गया तथा उन्होंने गलती स्वीकार की कि पीडी का उल्लेख पोर्टल में न लिए जाने से यह भूल हो गई। अधिवक्ता ने विभाग की इस गलती के कारण उपभोक्ता को हुई परेशानी व मानसिक वेदना का हवाला देते हुए न्याय करने की अपील की। इस याचिका पर न्यायमूर्ति अरूण कुमार सिंह देशवाल ने पांच फरवरी को निर्णय सुनाया तथा दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को आदेशित किया कि वह अनावश्यक रूप से विभाग की लापरवाही से परेशानी याची को 25 हजार रुपए अर्थदंड अदा करें, तथा इस गलती के जिम्मेदार कर्मी का पता लगाकर उस पर कार्रवाई करे व इस धनराशि को बसूले।

Global Times 7

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