स्वस्थ विचार से स्वस्थ समाज का निर्माण : प्रो.डॉ ध्रुव मिश्र

ग्लोबल टाईम्स 7 डिजिटल न्यूज नेटवर्क टीम लखनऊ उप्र. समाचार संपादक डॉ धर्मेन्द्र गुप्ता।
विश्व रक्तदान दिवस के पूर्व आरोग्य प्राप्ति हेतु विद्वत परिषद संस्कृत भारती बृज प्रांत उत्तरप्रदेश एवं युगधारा फाउंडेशन उत्तरप्रदेश के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित सर्वे संतु निरामया की भावना से परिपोषित आयुर्वेद शास्त्रे स्वास्थ्य संरक्षण्म के विषय पर विचार संगोष्ठी का गूगल मीट पर ऑनलाइन आयोजन किया गया जिसमें सारसस्वत अतिथि के रूप में प्रो (डॉ) ध्रुव मिश्र प्राचार्य एवं निदेशक आरजीएस आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर लखनऊ उत्तरप्रदेश, का विशेष सानिध्य प्राप्त हुआ। सरस्वती वंदना आगरा से नूतन स्वारिता, मंगलाचरण अलीगढ़ से डॉ जीवन सिंह आर्य , स्वागत गीत प्रस्तुति कारण पीलीभीत से संजीता सिंह जी, स्वागत भाषण सौम्या मिश्रा द्वारा दिया गया। प्रोफेसर मिश्र ने अपने वक्तव्य को समस्त विद्वत जनों को संबोधित करते हुए कहा कि दुःख से पीड़ित समस्त दुखो का हरण हो यही आयुर्वेद का मूल मंत्र है। उन्होंने आ नो भद्राः क्रतवो यंतु विश्वत अर्थात उन विचारों को ग्रहण करना चाहिए जोकि समस्त विश्व के लिए कल्याणकारी हो। स्वस्थ रहने के लिए स्वास्थवृत्त के नियमों का पालन करना चाहिए। एक अच्छा और उत्तम जीवन जीने के लिये चिंता विहीन जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए। चिंता से जुड़ी व्याधियों पर विस्तृत चर्चा करते हुए प्रोफेसर मिश्र द्वारा प्रीवेंटिव मैथड के तरीके पर प्रकाश डाला जिसमें 90 के दशक में आई आधुनिक तकनीकियों ने रोगों के बारे में तो बताया किंतु उन्होंने रोगियों को रोग से तड़पने के लिए छोड़ दिया। प्रोफेसर मिश्र ने कोरोना को आयुर्वेद का सबसे अच्छा मित्र बताया है, क्योंकि विश्व स्तर पर कोरोना केकॉल में ही आयुर्वेद को वृहद रूप में पहचान मिली। कार्यक्रम का संचालन डॉ अजित जैन व आभार प्रदर्शन डॉ रामकृष्ण सहस्रबुद्धे द्वारा किया गया।






