कैशलेस इंडिया तो बैगलेश स्टूडेंट्स क्यों नहीं !

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जनता के जेब पर ही क्यों ?
Global times7 news network
आप को बता दें जब से NDA की सरकार आयी तब से देश में एक नया उत्साह क्रांति देखने को मिल रही है, भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश से लेकर विदेश तक भारत के प्रगति के लिए निरंतर कार्य करते जा रहे हैं!
तरह तरह के नियम कानून नए नए तरीके जिससे देश आगे बढ़ सके प्रयासरत हैं, चाहे स्वस्थ हो, शिक्षा हो, शुरक्षा हो, चाहे आर्थिक छेत्र हो हमेशा कुछ न कुछ नया देखने मिलता रहता विपक्ष के घोर आलोचनाओं को भी दरकिनार करते हुए अपने कार्य को आगे बढाते रहते हैं।
इसी क्रम में एक सुपर प्रोजेक्ट का नाम है, डिजिटल इंडिया जिससे लगभग सभी सेक्टर को जोड़ा गया इस पर सरकार गम्भीर होते हुए तेज़ी से कार्य कर रही है, जो की सराहनीय है!
नोटबंदी के बाद कैशलेस प्रणाली पर सरकार का जोर रहा जिसमें हर बड़े व्यापारी दुकानदार को जोड़ा जा रहा है , नकदी लेन देन न करके सीधा बैंक RTGS, फोन ,पे आदि का प्रयोग करें जो शुरक्षा के दृष्टि से भी ठीक माना जा रहा है!
लगभग यह व्यवस्था जनधन खाता के जरिए, सहर से लेकर कस्बे गाँव तक पहुंच चुकी है, आज इसका प्रभाव लगभग हर जगह देखने मिल रही है!
चलो अब बात करते हैं, शिक्षा विभाग की ऑनलाइन फार्म, ऑनलाइन पढ़ाई,ऑनलाइन पेपर, ऑनलाइन पयेमेंट, कैशलेस इंडिया तो बैगलेश स्टूडेंट्स क्यों नहीं, क्यों सरकार किताबों का बोझ बच्चों क्यों पर डाल रही है, क्या सरकार की डिजिटल इंडिया प्रणाली यहां काम नहीं कर पा रही है। क्या सरकार इस विषय पर गम्भीर नहीं है!

अब बात करें 5 वीं क्लास के बच्चे की तो लगभग 8 से 9 किलो के वजन मिलेगा बैग,, जिसमे लगभग छे सात हजार रुपए की किताबें भारी हुई मिल जाएंगी ! अगर बच्चे को एक किलोमीटर विद्यालय जाना है, तो बच्चे के लिए अभिवावकों को अलग से सुविधा देनी पड़ती है! पूरे साल बच्चे उसी किताब के बोझ के तले दबा रहते है! क्या सरकार का ध्यान इस तरफ नहीं जा रहा य नजरअंदाज किया जा रहा जबकि टेक्नोलॉजी इतनी हाईटेक है, की लोग अब पेपर भी बैठकर नहीं चलते फिरते पढ़ रहे हैं!
तो बच्चों के ऊपर किताबों का बोझ क्यों !
मेरे लिखने का तात्पर्य बच्चों किताबों के बोझ से , मुक्त करना अभिवावकों , खर्चे लोड को कम करना जिससे असली डिजिटल इंडिया का सुख जनता को प्राप्त हो सके !
सरकार ने जनता की जेब तो हल्की कर दी लेकिन जनता के सर पर बोझ जस क तस बना हुआ है, यह विचारणीय है, हमें लगता है,इस विषय पर शिक्षा विभाग में बैठे अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए सरकार तक बात पहुंचानी चाहिए!
ताकि देश समाज का भला हो सके!…हर कदम सच के साथ
ग्लोबल टाइम्स 7 न्यूज नेटवर्क से संजय सिंह
लखनऊ उत्तर प्रदेश






