इधर संसद में पास हुआ वित्तीय बजट, उधर ग्रामीण बैंक शाखा दिलीपनगर में मानौ लग गया कंगाली का ग्रहण!

Breaking
इन दिनो ग्रामीण बैंक की शाखा दिलीपनगर बेचारी मानौ हुई कंगाल,
बैंक शाखा पहुचने वाले ग्राहक धारक खाता खोलने वाले आदि सरकारी फार्मो की फोटो कापी खुद करवाकर मजबूरन चला रहे अपना काम, बैंक शाखा कर्मी बला रहे टाल,
*बैंक शाखा कर्मी डाल रहे क्षेत्रिय लोगो की पाकेट पर घुमाकर खूब डाका, क्षेत्र में है सिर्फ इकलौती ग्रामीण बैंक शाखा,
ग्रामीण क्षेत्रिय जनता हुई हलकान, बेवश व लाचार, तो वही सौ पचास रूपये मे खुलेआम हो रही बैंक शाखा अधिकृत केदो से एनपीसीआई व केवाईसी, बैंक कर्मियो पर क्षेत्रिय ग्रामीण लगा रहे और भी कई मामलों में गम्भीर आरोप,
सरकारी फार्मो की फोटो कापी का मसला छोडो, बैंक अधिकृत केदों पर भी सौ से पचास रूपये से कम खातो में एनपीसीआई व केवाईसी के नाम पर नही खुल पाता बेचारा आधार सीडिंग वाला पोर्टल, क्षेत्रिय खाता धारको ने लगाये और भी कई गम्भीरता पूर्ण वाले शाखा की कार्यशैलियो पर आरोप
#
ब्यूरो रिपोर्ट –
कानपुर ।
जिले की उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक
बैंक शाखा दिलीप नगर के बैंक कर्मी इन दिनो क्षेत्रिय ग्रामीण जनता को खूब घुमा घुमाकर लूटने व थैली पर पड रही इन दिनो भारी मार से चूकते हुये नही दिखाई देते नजर आते हैं, जोकि बात क्षेत्रिय लोगो के गले से नीचे उतरकर हजम होते नही दिखती है,
बैंक कार्य हेतु दूर दराज गांवों से आये क्षेत्रिय ग्रामीणो के आरोपों के मुताबिक बैंकशाखा से मिलने वाले सरकारी फार्म यथा खाता खुलवाना, केवाईसी फार्म,आधार व मोबाईल लिंक कराने वाले आदि फार्मो तो बैंक में उपलब्ध होने चाहिये , लेकिन अफसोस सरकारी बजट के अभाव के कारण बैंक ग्राहको को फार्म न मिलकर उन्हे स्वयं उन फार्मो की खुद के खर्च से फोटो कापी आदि करवाकर आजकल लोगो को मन मशोसकर बैंक में मजबूरन काम करवाना पड रहा है, जो साधारणतया शाखा में अक्सर देखा जा रहा है,
एनपीसीआई अर्थात केवाईसी के नाम पर भी लोगो से मची लूट
क्षेत्रिय लोगो के मुताबिक इन दिनो बैंक में अधिकांशत: लोगों के खातो में से आधार व आनलाईन पैसा आदान प्रदान नही हो पा रहा है, जिसके कारण बैंक ग्राहको को बैंक शाखा पहुचने पर अधिकारियो द्वारा बताया जाता है कि आपका खाता केवाईसी एनपीआई न होने के कारण बंद अथवा लाक हो गया है, जिसके एवज में खाता धारको से बैंक अधिकृत सेवा केंदो से एनपीआई केवाईसी करवानी पडती है, जहा एनपीआई व केवाईसी के नाम हम खाता धारको से सौ पचास रूपये भी केंद संचालक ले लेते है, क्योकि बैंक शाखा अधिकारी एनपीआई व केवाईसी शाखा से न होपाने का हवाला देते हैं, जहा हम खाता धारको को खाता संचालन हेतु बेहद मजबूरी भी होती है,
कभी बैंक शाखा के बाहर बैंक सरकारी फार्मों की होने लगती है बिक्री भी
इतना ही नही बडी मजेदार बात तब सामने आती है जहां लोगो द्वारा बताया जाता है कि उन्होने इस केवाईसी, आधार लिंक व मोबाईल लिंक कराने वाले फार्म को इस दुकान से इतने रूपये मे खरीदा है,
जिला प्रशासन के लिये खडी होती गम्भीर चुनौती, भाजपा सरकार की छवि पर लग रहा सरकारी बजट का गहरा धब्बा,
तो ऐसी गम्भीर बातो पर अथवा परिस्थितयों पर जिले के प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्यवाही हेतु बडा प्रश्न चिन्ह भी खडा होताहै, कि क्या प्रशासन लेगा लोगो की ऐसी मजबूरियो का तनिक सा भी कुछ संज्ञान, लुटती क्षेत्रिय जनता पर लग पायेगी तनिक सी भी कुछ लगाम, अथवा बैंक शाखा कर्मी क्षेत्र में इकलौती बैंक शाखा होने का भरपूर फायदा उठाते हुये बेवश जनता की मंहगाई के दौर में डालते अथवा डलवाते रहेगे वर्तमान समय की भाजपा सरकार व प्रशासन की ठीक कुर्सी के नीचे खुलेआम डाका,क्षेत्रिय जनता को लुटने से भी मिल पायेगी जिले के प्रशासनिक अफसरो की कुछ दया दृष्टि से भी राहत,






