भैय्या बिल्हौर तहसील का कम्बल आखिर कहा तक सरक गया ?

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एसडीएम से सरका तहसीलदार से सरका लेखपाल से भी सरका !
आखिरकार तहसील प्रशासन की ठीक कुर्सी के नीचे से कहा तक सरक गया बेचारे कम्बल, जो कम्बल पाने वंचित रहे गये अर्थात कम्बल ताकते ही रह गये तहसील पहुचे बेचारे सैकडो ग्रामीण व किसान ??
*कम्बल सरकते सरकते इतना सरक गया कि एक कम्बल पाने की चाहत रखने वाले सैकडो जरूरत मंद किसानो तक बेचारा कम्बल पहुच ही नही पाया*
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कंबल पाने की चाह में बिल्हौर तहसील पहुंचे सैकड़ों किसान मायूस लौटे,
किसानों का आरोप पहले कंबल देने हेतु बुलाया फिर एक दूसरे अधिकारी पर बहाना बना बैरक लौटाया,
ठिठुरते हुए भीषण ठंड में दूर दराज के कई गांवों से पहुंचे थे महिला पुरुष सैकड़ों किसान,
*फिर भी गरीब मजलूम किसानों पर रहम नहीं खाये जिम्मेदार अधिकारी, आखिर क्यो रही ऐसी बेचारे ग्रामीणो के साथ ओछी हंसी ठिठोली,*
जमीनी स्तर पर गरीब मजलूमों की मदद के बजाय सोशल मीडिया पर आये दिन चंद कंबलों का वितरण कर सुर्खियों बटोरते है जिला व तहसील के जिम्मेदार अधिकारी, ऐसा क्यो ?
जरूरत मंदो तक नहीं पहुंच पा रहे कंबल तो फिर आखिर कहा हो रहा कंबल वितरण बड़ा सवाल,
*कानपुर जिले के बिल्हौर तहसील का कम्बल सरकने वाला मामला*
रिपोर्ट – आलोक मिश्रा






