जाब कार्ड संख्या अन्य लाभार्थी के नाम दर्ज कर,दिया आवास,लाभार्थी अफसरों की चौखटों के लगा रहा आज चक्कर

:- वर्तमान आवास सूची से लाभार्थी का नाम बाहर किये जाने पर हुआ पूरा खेल उजागर, डीएम से लगाई न्याय की गुहार
:- विकास खंड शिवराजपुर के जादेपुर धस्सा गांव में झोपड़ी में रहने वाले गरीब लाभार्थी को पंचायत सचिव ने पीएमएवाई योजना से कर दिया बाहर,
:- वित्तीय वर्ष 2018-19 में लाभार्थी के जाब कार्ड संख्या के आधार पर दूसरे लाभार्थी को जारी हो चुका है आवास,
ग्लोबल टाइम्स-7
न्यूज नेटवर्क टीम
कानपुर नगर
एक तरफ योगी सरकार निर्धन,गरीब व शोषित वंचित परिवारों को आवासीय सुविधा मुहैया कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है तो दूसरी ओर जमीनी स्तर पर हकीकतें व सच्चाईयां कुछ और ही बयां करती हुई नजर आ रही है, वहीं खाऊ कमाऊ नीति के चलते जिम्मेदार लोगों ने भी मानौ जैसे अपनी आंखें बंद करके वास्तविक
पात्र लाभार्थियों को अपात्र व धनाढ्य वर्ग व पक्के मकान धारकों को वास्तविक पात्र लाभार्थियों का दर्जा दे कर उन्हें आवास योजनाओं से भरपूर फायदा दिलाने की कसम खा ली हो,
इन दिनों ऐसे कार्य दलालों व कमीशनखोरी करने वाले लोगों द्वारा चरम पर है।
मनरेगा जाब कार्ड संख्या दूसरे लाभार्थी के नाम पर दर्ज करवा कर,वास्तविक लाभार्थी को दिया गया आवास
जनपद के विकास खंड शिवराजपुर की ग्राम सभा जादेपुर धस्सा गांव से एक नया मामला उजागर होकर सामने आया है,गांव निवासी पीड़ित लाभार्थी कृष्ण कुमार गौतम ने डीएम विशाख जी को शिकायती पत्र देकर बताया कि उसका परिवार एक टूटी फूटी झोपड़ी के नीचे पत्नी गुड़िया व दो बच्चों के साथ रहता है, काफी लंबे समय से प्रधानमंत्री आवास की लिस्ट में नाम चल रहा था,परंतु ग्राम सभा के प्रधान पति के मांग के अनुरूप सुविधा शुल्क न देना उसको भारी पड़ गया,और पंचायत सचिव व ग्राम प्रधान पति की मिली भगत के चलते आवास सूची से उसका नाम काट दिया गया, उसने डीएम को यह भी बताया की जब पीड़ित ने आवास सूची से नाम कटने की जानकारी पर ब्लॉक अधिकारियों से बात की तो पता चला कि पीड़ित लाभार्थी के नाम दर्ज मनरेगा लेबर कार्ड नंबर UP7006059001/ 0010 कृष्ण कुमार पुत्र मुरली का आवास
वित्तीय वर्ष 2018-19 को गांव के ही राजेश्वरी पत्नी चंदराज को प्राप्त हो चुका है, शिकायतीपत्र में पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि विकास खंड स्तरीय अधिकारियों व प्रधान की मिली भगत के चलते मेरी जगह पर दूसरे लाभार्थी को मिलने वाली आवास
धनराशि भी खाते में स्थानांतरित 20/12/2018 को कर दी गई थी, जहां हमें आज तक आवास योजना से वंचित रखा गया ।
पीड़ित ने आरोप लगाते हुए बताया कि विकास खंड अधिकारियों ने उसे बताया कि मनरेगा जाब कार्ड संख्या के आधार पर एक बार आवास आवंटित हो जाने के कारण अब दोबारा उसे आवास योजना का लाभ प्राप्त नहीं हो सकता है। इस पर लाभार्थी ने विकास खंड अधिकारियों सहित पंचायत सचिव पर आपत्ति जताई लेकिन ब्लाक स्तरीय अधिकारियों ने एक भी सुनी । और पीड़ित अधिकारियों के दफ्तरों के कार्यालयों की चौखटों पर दर दर ठोकरें खाने पर आज भी मजबूर हैं । पीड़ित ने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाते हुए कहा अब यदि उसे न्याय नही मिला तो परिवार के साथ डीएम कार्यालय पर भूख हड़ताल पर बैठ जायेगा, इसपर डीएम विशाख जी अय्यर ने पीड़ित को आश्वस्त करते हुए कहा कि तुम्हे न्याय मिलेगा,जो भी दोषी होगा उसे कतई नहीं बख्शा जाएगा।
सीडीओ का सीयूजी संपर्क नं बताता रहा बंद,डीसी मनरेगा का नहीं रिसीव हो सका फोन,सीडीओ से करें बात डीएम कार्यालय की व्यक्त हुई प्रतिक्रिया
इधर,पूरे प्रकरण को लेकर मीडिया टीम द्वारा जब डीसी मनरेगा व बीडीओ प्रभार शिवराजपुर रमेश चंद्र के सम्पर्क सूत्र नं 8765983082
पर जानकारी प्राप्त करने की कई बार कोशिश की गई ,तो उन्होंने फोन रिसीव करना मुनासिब नहीं समझा,वहीं सीडीओ सुधीर कुमार का सीयूजी नंबर 9454418877
लगातार स्विच ऑफ ही जाता रहा,डीएम कार्यालय में बात करने पर प्रतिक्रिया प्राप्त हुई कि पूरे मामले की जानकारी सीडीओ सी प्राप्त करें ।
जिले के अधिकारियों का यह हाल,पीड़ित घनचक्कर खा रहे ठोकरें
अब ऐसे में सवाल उठता है कि जब जनपद के जिम्मेदार पदों पर आसीन अधिकारियों व कर्मचारियों का ही हाल यह होगा तो निचले स्तर पर कैसी व्यवस्था चल रही होगी, अनुमान ही लगाया जा सकता है और वास्तविक पीड़ित अपना शिकायतीपत्र लिये दर दर की ठोकरें खाने पर मजबूर ही होते रहेंगे।
अब देखना होगा कि क्या पूरे प्रकरण को लेकर जनपद के डीएम कोई एक्शन लेने का प्रयास करेंगे अथवा सिर्फ लाभार्थी को कोरा आश्वासन ही हाथ लगेगा,कमीशनखोरों व दलालों की यही लीला विद्यमान रहेगी और सरकार भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनाने सपना संजोए बैठी रहेगी।






