श्रीमद् भागवत कथा सुनकर श्रद्धालु हुए मंत्रमुग्ध- भरथना

ग्लोबल टाइम्स 7 न्यूज़ नेटवर्क जिला इटावा ब्यूरो चीफ बृजेश पोरवाल
भरथना-मोतीगंज में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में आज आचार्य केशवम अवस्थी जी महाराज ने कहा कि सनातन चार आश्रम होते है ब्रम्हचर्य गृहस्त वानपप्रस्थ और संन्यास आचार्य जी ने कहा कि मनुष्य को घर में तो रहना चाहिए लेकिन घर को अपने में नहीं रखना चाहिये घर के प्रति आशक्ति नहीं होनी चाहिए आगे समुद्र मंथन की कथा को सुनाया और फिर वली वमन चरित्र को सुनाया और आचार्य जी ने कहा की हमें अपने सब कुछ भगवान् के प्रति समर्पित कर देना चाहिए तो भगवान् उस धन को भी द्वारपाल बन के रखायेगा इसीलिए भगवान् वली के यहाँ द्वारपाल बने और मगराज जी ने बताया कि व्यक्ति को दूसरों से कुछ कहने से पहले अपने आप को देखना चाहिए पहले खुद को बदलना चाहिए तभी बो दुसरो से कुछ कह सकता है आगे सूर्यवंश का वर्णन किया फिर भगवान् राम जी के चरित्र को सुनाया आचार्य जी ने कहा कि राम जी का जीवन ही अनुकरणीय है राम जी का जीवन ही मनुष्य जीवन जीने की कला है और राम जी ने संसार को बताया की व्यक्ति का व्यवहार क्या होना चाहिए पुत्र का पिता के प्रति,माता का पुत्र के प्रति,भाई का भाई के प्रति राम के मर्यादा और भारत की सभय्ता के प्रतीक है ।

और आचार्य जी ने ये भी कहा की राम जी का चरित्र हमको बताता है कि कोई गरीब व्यक्ति भी हो तो उससे हमें कैसा व्यवहार करना चाहिए भगवान् ने केवट के यहाँ भी जाकर नाव मांगी ,राम जी धर्म के साक्षात् श्रीविग्रह है किसी को धर्म जानना हो तो वह राम जी का जीवन देखे इसके बाद बताया कि राम जी के जीवन में कैकई का भी योगदान है राम जी जी जीवन पूजनीय है आज व्यक्ति को राम जी के पदचिंन्नोहो पर चलने की जरूरत है ,और ये भी कहा की आज के राजनेताओं को भी राम जी के जीवन से शिक्षा लेनी चाहिए राम जी 14 वर्ष के बाद राजा बने क्यों की राम जी ने पहले अपने राज्य को पूरा देखा और अपनी प्रजा की समस्यायों को समझा तब 14 वर्ष बाद राजा बनकर उनकी समश्या को दूर किया आज राज नेताओ को राम जी से शिक्षा लेनी चाहिए फिर इसके बाद श्रीकृष्ण जन्म की कथा को सुनाया कृष्ण जन्मोत्सहव में सभी श्रोता झूम उठे। श्रीमद्भागवत में आए हुए श्रद्धालु जन।
परीछत अरविंद दुबे, निर्मला दुबे, अनुराग दुबे, सांसद प्रतिनिधि श्री भगवान पोरवाल, अमोल दुबे, सौरभ दुबे, नितिन दुबे, सुबोध दुबे, संजय तिवारी, संतोष वर्मा सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा का आनंद लिया और अच्छे विचार ग्रहण किए।






