आखिर क्षेत्रिय कार्यालय कानपुर के किस अधिकारी के संरक्षण फल फूल रहे अवैध जन सेवा केंद्र!

आखिर क्षेत्रिय कार्यालय कानपुर के किस अधिकारी के संरक्षण में ग्रामीण बैंक की शाखाओं के गेट पर,अथवा विना गैर आवंटित गांव व कस्ब वार्डों में धड्डले से संचालित हो रहे बैंकिंग जनसेवा केंद*
*बैंक द्वारा आवटित “मैप लोकैशन गांवों व वार्डों” में न संचालित होकर,जबकि बैंक शाखाओ के इर्द गिर्द ही खुलेआम धमाचौकडी मचा रहे गैर मानक संचालित जिले के सैकडों बैंकिंग सेंटर्स,जिसमें है किसका संरक्षण प्राप्त ?
*जिले के सभी बैंकिंग सेवा केदों का संचालन उनके सम्बद्धता वाली कार्पोरेट बीसी कंपनियों के नियम एवं शर्तों मुताबिक केंद संचालक अपना अपना बैंकिंग बीसी केंद अपने अपने आवंटित निर्धारित गांव मैप की नियत लोकैशन पर ही कर रहे हैं,* —
– *संजीव कुमार क्षेत्रीय प्रबंधक, क्षेत्रीय कार्यालय कानपुर*
प्रभाकर अवस्थी
कानपुर नगर ।
शासन द्वारा गांव समेत कस्बा शहरों में बैंक शाखाओं को खुलवाकर ग्रामीण व शहरी जनता को बैंकिंग सेवाओं से लाभान्वित कराने का कार्य पिछले कई सालो से होता चला आ रहा है, इतना ही नही प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा डिजिटल इंडिया को बढावा देते हुये प्रत्येक निचले पर लोगों को बैंकों से जोडकर उनके खाते खुलवाकर बैंकिंग एवं सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके का कार्य कराते हुये बढावा दिया गया । जहां इसी के तहत बैंकों में अधिक लोड बढने के तहत मोदी जी विगत वर्ष 2014-15 में प्रधान मंत्री जन धन योजना की लांचिग की, जिसके तहत बैंकों के सहयोग हेतु शासन व बैंको की मध्यस्थता के बीच विभिन्न कंपनियों के माध्यम से वित्तीय समावेशन के तहत बैंक मित्रों का चयन किया गया । जिनका कार्य एवं उद्देश्य यह था कि जो भी दूरस्थ गांवों के लोग है उन्हें अपने ही गांव में आसानी से मिनी बैंक / बैंकिग ग्राहक सेवा केदों के माध्यम से हर प्रकार की बैंकिंग सेवाओं एवं योजनाओं का लाभ भी आसानी से मिल सके। और बैंक शाखाओं तक पहुचने वाले लोगों को बैंक तक व्यर्थ की भाग दौड न लगानी पडे । और बैंक पर भी छुटपुट कामों का अत्यधिक बोझ न पड सके ।
आपको बताते चले कि जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में जहां देखा जाये तो अधिकत्तर जगहों पर भारत सरकार व राज्य सरकार के बैंकिंग सेक्टर से जुडी बैंकों में बडौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की ही अधिकांशत: सिर्फ शाखाएं खुली हुई हैं जो पूरे जनपद में 70-75 के लगभग शाखायें खुली हैं,इसके साथ ही जहां बडौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के क्षेत्रिय कार्यालय काकादेव कानपुर से जुडकर जिसमें सहयोगी बैंकिंग सेवा केंदों की लिखित आंकडों को मुताबिक वर्तमान समय में 200 के लगभग संख्या है, जो बैंक व कारपोरेट बीसी कंपनी की मध्यस्थता बीच बैंक द्वारा दिये गये बैंकिंग कोड लाईसेसो जारी किया जाता है, बैंकिंग लाईसेंस जारी हो जाने पर बैंकिग सेवा केदों को शाखा से बैंक पैरामीटर दूर मानक के तहत अपने “आवंटित गांव मैप लोकैशन” ही संचालित होने की बैंकिंग नियमावली प्रावधान एवं शासनादेश भी है ।
लेकिन एक विष्लेषण पर तो जमीनी स्तर हकीकतें तो और कुछ बयां करती हुये इसके विपरीत ठीक साफ साफ देखने मे आ रहा है कि बडौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक क्षेत्रिय कार्यालय कानपुर से जुडें हुये दर्जनों कारपोररेट बीसी कंपनियों के लगभग 200 बैंकिग सेवा केंदों के बीसी प्वाईटों में शायद ही यदा कदा एक आध ही अर्थात जो विरला बीसी केंद शासन एवं बैंक मानक व नियमावली के तहत संचालित हो रहैं । बाकि शेष सभी या तो बैंक परिसर के अंदर ही, अथवा बैंक शाखाओं के ठीक गेट पर, या फिर बगल में सम्वंधित बैंक शाखा प्रबंधकों व क्षेत्रिय कार्यालय कानपुर के एक अधिकारी के खुले संरक्षणअर्थात खुली संलिप्ता में,व बैंक अधिकृत मध्यस्था वाली जिले की विभिन्न कंपनियों यथा मापरा, सीएससी, विजन इंडिया,वक्रांगी, इत्यादि के एरिया मैनेजरों के माध्यम से प्रति सेंटर से कमीशन खोरी व क्षेत्रिय कार्यालय के एक जिम्मेदार बैंक अधिकारी की कृपा दृष्टि के ठीक नाक के नीचे जिले के सैकडों बैंक सेवा केंद असंवैधानिक रूप से धडड्ले से खुलेआम चलते दिख रहे हैं।
ज्ञातव्य हो कि जिले की बडौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक शाखाओं यथा- बिल्हौर,चौबेपुर, उत्तरीपूरा,रेऊना, परास, नौरंगा, इटर्रा, सजेती,नवेली,अरौल,सम्भरपुर मानपुर, घाटमपुर, साढ, सखरेज, बीरामऊ, नरवल,बर्राजपुर शिवराजपुर, भीतरगांव दिलीपनगर,विषधन, घाटमपुर, बिधनू आदि करीब आधा सैकडा शाखाओं से अधिक जुडे बैंकिंग सेवा केदों का संचालन धडड्ले से क्षेत्रिय कार्यालय के उस अधिकारी के संरक्षण में शाखा प्रबंधकों एवं सम्वंधित कार्पोरेट कंपनियो के मैनेजरों की संलिप्तता में बैंकिंग सेवा केंद अपने आवंटित गांव व वार्ड से संचालित होकर मनमाने ढंग से कस्बा व बैंक शाखाओं के समीप चल रहैहै।जोकि कानपुर क्षेत्रिय कार्यालय के एक जिम्मेदार अफसर का संरक्षण प्राप्त केंद संचालक अपना बीसी केंद आवंटित गांव/ वार्ड मैप लोकैशन की बजाय अपने मनमाने ढंग से मानक विपरीत संचालित सेवा केंद क्षेत्रिय कार्यालय के बैंक अफसर के कृपा पात्र आज भी बने हुये हैं ।
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जब बैंक शाखाओं के गेट पर,बगल में ही कराना था संचालन तो फिर गांवों के नाम का आवंटन फिर क्यो ?
अब ऐसी दशाओं में बडौदा यूपी ग्रामीण बैंक के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली व्यवस्थाओं पर प्रश्नचिन्ह लगते हुये एक बडा सवाल खडा हो जाता है कि यदि सैकडों की संख्या में संचालित बैंकिंग सेवा केदों का खुलेआम संचालन बैंक शाखों के गेट पर, बैंक शाखाओं के बगल में ही कराना था तो शासनादेश एवं बैकिंग मानक व नियमावली के तहत बैंकिंग सेवाओं व योजनाओं से अछूते दूरस्थ गांवों के नामों पर बैंकिंग सेवा केंदों के लाईसेसों एवं आवटंन की प्रक्रियाऐं ही क्यो अपनाई गयी?
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*बडौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की शाखाओं से जुडे हुये बैंकिंग सेवा केंद ग्राहकों के लिये साबित हो रहे अर्थहीन अर्थात औचित्यहीन, क्यो ?*
शासन स्तर से बैंक शाखाओं के साथ जुडकर कार्य वाले सेवा केंद सिर्फ कागजो पर ही सेवा प्रदाता कंपनियों के एरिया मैनेजरो के मध्यस्थता में बैकिंग सेवा केदों का संचालन निर्धारित गांंव गांव भले ही किया जा रहा हो, लेकिन धरातलीय व जमीनी हकीकतें कुछ और ही उजाकर होकर सामने निकल कर आती है।
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*तो क्या ? बडौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक क्षेत्रिय कार्यालय कानपुर के बैंक अफसर दे रहे मोदी जी डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था को खुला चुनौती*
पाठकों बताना है कि मोदी सरकार की बैंकिंग डिजिटलीय करण व्यवस्था की गांव गांव अर्थात डोर टूर डोर बैंकिंग नियमावली ऐसे में तो पूरी तरह चकनाचूर होती दिख रही है जिसका बैंक अधिकारी मानो जैसे खुला चैलेंज कर रहे हों, ऐसे में इस तरह के गोरख धंधों की कहानी भी तो यहीं पर नही खत्म होती दिखती है, बैंक शाखा के कार्य क्षेत्र वाले गांव आवंटित सेवा केदों के बैक शाखाओं के गेट पर, शाखा परिसर के अंदर ही संचालन कराकर बैंक के सरकारी अफसर मोदी जी एवं योगी जी के मंसूबों पर सीधे तौर पानी फेर कर खुलेआम उनके निर्देशों को चुनौती भेंट करते हुये भरपूर देखे जा रहे हैं। इसके साथ ही साथ जिस गांव के नाम से आलाटमेंट हुये बैंकिंग सेवा केद को उसी गांव में संचालन करना चाहिये, उस ही गांव में न होने से बैंक खाता धारकों को बैंकिंग सेवा व सरकारी योजनाओं से जुडी समस्याओं से निजात एवं लाभ लेने के लिये व्यर्थ की भागदौड कर बैंक शाखाओं अथवा शाखा परिसर के अंदर अर्थात बैंक शाखाओं के गेट पर संचालित हो रहे सेवा केदों पर चक्कर लगाना भी दूर दराज के गांव के लोगों के सामने एक बडी विवशता एवं विषम परिस्थिति है।
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क्या बोले जिम्मेदार –
जब ऐसे मामले में कानपुर डीएम आफिस एवं एल्डीएम कानपुर से संवाददाता द्वारा वार्ता की गई तो उन्होने बताया कि मामला संज्ञान में आया सम्वंधित बैंक के क्षेत्रिय कार्यालय को लिखित पत्र भेजकर जानकारी ली जायेगी, तत्पश्चात जांचोपरांत अग्रिम कार्यवाही अवश्य ही अमल में लाये जाने का प्रयास किया जायेगा, शासन के निर्देशों का कडाई से पालन कराने का भी प्रयास किया जायेगा। बैंकिंग योजनाओं का लाभ लोगों को उनके ही गांव में आसानी से मिल सके ध्यान में अवश्य रखा जायेगा ।
उधर, बडौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक क्षेत्रीय कार्यालय कानपुर के एक लिखित पत्राचार के माधयम से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो लिखित जवाब में बताया जा रहा कि उनके जिले के सभी बैंकिंग सेवा केदों का संचालन उनके सम्बद्धता वाली कार्पोरेट बीसी कंपनियों के नियम एवं शर्तों मुताबिक केंद संचालक अपना अपना बैंकिंग बीसी केंद अपने अपने आवंटित निर्धारित गांव मैप की नियत लोकैशन पर ही कर रहे हैं,… आगे और भी…





