ग्राम पंचायत मझौआ दूधनाथ में महिलाएं और पुरुष खुले में शौच करने को मजबूर

धीरेंद प्रताप सिंह, ग्लोबल टाईम्स 7 न्यूज नेटवर्क लखनऊ उत्तर प्रदेश
गौर, बस्ती। उत्तर प्रदेश जनपद बस्ती के विकास खंड गौर के ग्राम पंचायत मझौआ दूधनाथ में बना सामुदायिक शौचालय दिखाने के लिए हाथी के दांत साबित हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत सामुदायिक शौचालय बनवाए गए थे। इसके तहत अपने आसपास सफाई रखने के साथ ही खुले में शौच करने पर रोक है। ऐसा करने के पीछे मकसद यह है कि खुले में शौच करने से बीमारी फैलती है। अब ये शौचालय शो-पीस नजर आ रहे हैं। इन शौचालय पर ताले जड़े हैं। इसके चलते गांव के लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सालों से बनकर तैयार शौचालय सिर्फ शोपीस बना हुआ है,जिससे ग्रामीण महिलाएं और पुरुष खुले में शौच जाते है.जिससे उन्हें शर्म महसूस होती है महिलाएं खुले में स्नान करने को मजबूर हैं। इसकी शिकायत ग्रामीणों ने प्रधान व सचिव से की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
‘इज्जत घर’ के नाम से बने इन शौचालयों पर ताले लटके होने के कारण गांव के महिला और पुरुष खुले में शौच करने को मजबूर हैं। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस सोच के तहत इस शौचालय का निर्माण कराया गया था उसका उपयोग कोई भी गांव का व्यक्ति नहीं कर पा रहा है। खुले में शौच जाने में डर तो लगता है साथ ही शर्म भी बहुत आती है।
ग्राम पंचायत मझौआ दूधनाथ से इस बारे जब वर्तमान प्रधान प्रतिनिधि राम शंकर यादव से पूछा गया यह शौचालय क्यों बंद है उन्होंने बताया कि हमको नहीं पता क्यों बंद है। उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की तथा ग्राम पंचायत विकास अधिकारी ने बताया कि इसकी जानकारी करनी पड़ेगी की क्यों नहीं ताला खुल रहा है। जब इस बारे में एडीओ पंचायत गौर से पूछा गया कि सामुदायिक शौचालय का ताला क्यों बंद है। उन्होंने बताया इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। इससे साबित होता है कि प्रधान प्रतिनिधि एवं सचिव नहीं चाहते हैं कि भारत स्वच्छ मिशन के तहत लोग शौचालय के अंदर जाकर शौच करें। गांव के लोगों ने बताया कि इसकी जांच कराकर दोशी व्यक्ति को जरूर दंडित किया जाए। तथा शौच का इस्तेमाल हो सके।






