धर्म

अपना पराक्रम ईश्वर को समर्पित करने वाला कभी पराजित नहीं होता

ग्राम करमपुर में चल रही भागवत कथा में अंतिम दिन आचार्य गोपाल कृष्ण त्रिपाठी ने सुनाया भीम-जरासंघ युद्ध प्रसंग

जीटी-70017, राम प्रकाश शर्मा ब्यूरोचीफ औरैया।
10 अगस्त 2023

#औरैया।

कोई भी पराक्रमी मनुष्य अपना विश्वास ईश्वर पर रखते हुए मैदान में डटा रहता है तो भगवान उसके भरोसे को टूटने नहीं देते हैं। ऐसा व्यक्ति जब घोर संकट में घिर कर सब कुछ भूलकर भगवान पर आस लगा देता है तो भगवान उसे अपने समान बल प्रदान कर न केवल उसकी रक्षा करते हैं बल्कि विजयी भी बनाते हैं । इसलिए मनुष्य को कभी निराश नहीं होना चाहिए, ईश्वर के ऊपर सब कुछ छोड़ कर अपना कर्म करते रहना चाहिए। यह उपदेश श्रीमद्भागवत कथा सुनाते हुए आचार्य गोपाल कृष्ण त्रिपाठी ने यहां शहर के समीपवर्ती ग्राम करमपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह में भीम और जरासंध के मल्लयुद्ध और गदायुद्ध का प्रसंग सुनाते हुए कही।


कथा में उन्होंने बताया कि जरासंध और भीम दोनों ही गदायुद्ध और मलयुद्ध के सर्वश्रेष्ठ योद्धा थे। दोनों के बीच 26 दिन तक युद्ध में क़ोई परिणाम ही नहीं निकला किंतु 27वें दिन जरासंध ने भीम को इतनी जोर से पछाड़ा कि वह स्वयं को जरासंध से बलहीन अनुभव करने लगे। अगले दिन फिर युद्ध हुआ इस बार जरासंध ने भीम को इतनी जोर से पटका कि उन्हें अपने प्राणों पर संकट महसूस होने लगा। लेकिन पराक्रमी भी फिर भी किसी तरह से बच गए। अगले दिन फिर से युद्ध होना था भीम को रात भर नींद नहीं आई। उन्होंने सोचा इस तरह से तो उनकी मृत्यु निश्चित है। इसके लिए उन्होंने भगवान कृष्ण से कहा तो भगवान ने उन्हें भरोसा दिया कि हम तुम्हारे साथ हैं। इसलिए निश्चिंत रहो। लेकिन जब युद्ध हुआ तो भगवान ने उनकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया और भी ने थक हारकर अंतत अपने आप को भगवान के के ही समर्पित कर दिया। बस यही से भगवान ने भीम को अपने अंदर का नरसिंह अवतार वाला बल प्रदान किया और भी ने जरासंध को पराजित कर उसका वध कर दिया। इस तरह से भीम के प्राण बचे और उन्हें जरासंध से विजय भी मिली। इसका तात्पर्य है कि जब कोई व्यक्ति स्वयं कर्मशील रहते हुए रहते हुए अंत में जब स्वयं को प्रभु को अर्पित कर देता है तो प्रभु उसकी सहायता अवश्य करते हैं। इस दौरान परीक्षित हरिहर नारायण शुक्ला एवं बिड़ानी देवी, आत्माराम शुक्ल, राजीव कुमार शुक्ल, मंजुल कुमार शुक्ल, विजय कुमार शुक्ल, श्यामशरण शुक्ल, रामशरण शुक्ल, सिद्धार्थ, शुभांगम, कार्तिकेय, बिट्ठल द्विवेदी, एडवाकेट आलोक रंजन मिश्रा (गोपाल), गौरव अवस्थी, माताप्रसाद शुक्ल, देवेश श्यामू, रामू, ओमजी आदि व्यवस्थापकों समेंत सभी ग्रामवासी व भारी संख्या में आस पास क्षेत्र के श्रोतागण उपस्थित रहे।

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