वृक्षारोपण के नाम लाखो का हो गया खेल

– वृक्ष लगाने के नाम पर बजट निकला, वृक्षो का अता पता नहीं
अविक शुक्ला
तहसील बिंदकी संवाददाता
Global times 7news network,fatehpur
बिंदकी/फतेहपुर । देवमई विकासखंड की 60 ग्रामपंचायतों में वृक्षारोपण के नाम पर ग्राम प्रधानों और सचिवों द्वारा लाखो रुपये का बंदरबाट किया गया है। पर्यावरण को साफ स्वच्छ बनाने के लिये ग्राम पंचायत स्तर पर सरकार द्वारा पौधरोपण कराने के लिये गाइडलाइन जारी की गई थी। जिसमें ग्राम पंचायतो में हजारों की संख्या में पौधरोपण का कार्य भी कराये जाने का आदेश भी जिला प्रशासन द्वारा किया गया था। लेकिन जिम्मेदारों ने पौधरोपण के कार्य को धरातल में अंजाम न देकर सिर्फ कागजी आंकड़ो तक ही सीमित कर दिया बल्कि योजनाओं को धरातल में उतरने से पहले ही वृक्षो की बलि चढ़ा दी गयी है। गांवों में साफ सुथरा वातावरण बनाने के लिये ऑक्सीजन, फलदार युक्त पौधे लगवाने के लिये फंड भी जारी किया गया था लेकिन वन विभाग की उदासीनता व लापरवाही के चलते पौधे लुप्त नजर आ रहे है। सूत्रों की माने तो क्षेत्र की अधिकांश ग्राम पंचायतों के प्रधान व सचिवों ने वृक्षा रोपण के लिए अवमुक्त की गई लाखों रुपये की सरकारी धनराशि को डकार लिया। जिन्होंने बगैर वृक्षा रोपण कार्य करवाए ही फर्जी रिपोर्ट शासन व प्रशासन को भेजकर गुमराह किया है। वित्तीय वर्ष 2016 से 2022 तक प्रत्येक ग्राम पंचायत में मनरेगा सहित अलग-अलग मदों से लगभग लाखो रूपये खर्च करके हजारों वृक्षो का वृक्षारोपण कराया गया। इसमें प्राईवेट नर्सरी के ब्यवसाइयों, ग्राम प्रधानों और ग्राम विकास अधिकारियों ने बडा खेल किया है। पूरे वृक्षारोपण अभियान की निष्पक्ष जाँच कराई जाए तो एक बड़ा बंदरबाट सामने आ सकता है। लोगो की माने तो यही नहीं बल्कि मनरेगा योजना के तहत कराए गए कार्यो में भी झोल किया गया है।

– लाखों पेड़ लगे लेकिन बिना परवरिश खड़े ही नही हुए
बता दें कि वन क्षेत्र बढाने और पर्यावरण संतुलन कायम रखने की मंशा से हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी ग्राम सभाओं के मजरों से लेकर गांवों में सड़क किनारे से लेकर ग्राम समाज की जमीनों तक पौध रोपण का अभियान चलाया गया। इसके तहत पौधों की खरीद के साथ ही उन्हे लगवाने, गढ्ढों की खुदाई कराने तथा मजदूर लगा कर उन्हे तैयार करवाने तक में लाखों रुपये का खर्च दिखाया गया। लेकिन कितने पेड़ खरीदे गये और कहाँ लगाये गऐ धरातल में इसका कोई भी रिकार्ड देखने को नहीं मिल रहा। विकास खण्ड की अधिकांश ग्राम पंचायतों व मजरों में वृक्षारोपण नजर ही नहीं आ रहा। जिन गांवों में पौधरोपण यदा कदा किया भी गया तो वह भी परवरिश के अभाव में लुप्त हो गए हैं। जबकी जिम्मेदारों ने इनकी देखभाल करने के लिए मजदूरों को भी लगाये जाने के आँकडे भी दिखाए हैं। जिनकी मजदूरी भुगतान के नाम पर भी लाखों रुपये फर्जी तरीके से बाउचर बनाकर भुगतान कराये गये। इसके बावजूद भी विकास खण्ड के अधिकांश गांवों में पौधे नही दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा जहाँ बीते सालों में पौधरोपण दर्ज है, वहीं इस साल फिर से दुबारा पौध रोपण के नाम पर जिम्मेदारों ने बड़ा भ्रष्टाचार किया है। जिन्होंने पौध रोपण के नाम पर न सिर्फ सरकारी निधि का बड़े पैमाने पर बंदरबांट किया है बल्कि सरकार की जनहितकारी पर्यावरण संतुलन योजना को भी सरेआम पलीता लगाया है। अगर इसकी गहन जांच हो जाये तो वन विभाग से लेकर ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारियों समेत ग्राम प्रधानों व पँचायत सेक्रेट्रियो की भ्रष्ट कार्यनीतियों की कलई खुलनी भी तय है।






