उत्तर प्रदेशलखनऊ

ब्रह्मलीन शोभन सरकार की माता का हुआ स्वर्गवास

अविक शुक्ला
तहसील बिंदकी संवाददाता
Global times 7news network,fatehpur

बिंदकी/फतेहपुर । देवमई ब्लाक के मुसाफा ग्राम में अपने ननिहाल में जन्मे ब्रह्मलीन श्री श्री 1008 श्री विरक्तानंद शोभन सरकार महाराज जी की माता चंदी का 107 वर्ष की उम्र में बुधवार को उनका स्वर्गवास हो गया । विरक्तानंद शोभन सरकार का जन्म फतेहपुर जनपद के देवमई ब्लाक के मुसाफा ग्राम में उनके नाना स्वर्गीय भगोले तिवारी के घर मे जन्म हुआ था । इनके पिता जी का पैत्रक गांव शुक्लन पुरवा ,पिता का नाम पंडित कैलाशनाथ तिवारी था। कहते हैं कि शोभन सरकार को 11 साल की उम्र में वैराग्य प्राप्त हो गया था। शोभन सरकार ने गांव के लोगों के लिए कई तरह के जनहित के काम किए। यही वजह है कि गांववाले भी उन्हें अब भगवान की तरह मानने लगे थे। महाराज कपड़े के नाम पर वह सिर पर साफा बांधते थे। गेरुए रंग की लंगोट पहनते थे और सिर पर चादर बांधते थे और बदन पर अंगवस्त्र होता था। शोभन भगवान राम और हनुमान जी के बहुत बड़े अनन्य भक्त थे। बताया जाता है कि उन्होंने राम और हनुमान के कई मंदिरों का निर्माण भी करवाया है।

हाईस्कूल के बाद घर छोड़ा, फिर ली दीक्षा और शिवली में स्थापित कराया शोभन आश्रम

ब्रह्मलीन विरक्ता नन्द शोभन सरकार ने कानपुर के मंधना स्थित बीपीएमजी इंटर कालेज में हाईस्कूल तक पढ़ाई की। इसके बाद अचानकर गृहस्थ जीवन त्यागकर गुरु स्वामी सत्संगानंद जी की शरण में पहुंच गए। गुरु से आठ वर्ष तक दीक्षा लेने के बाद उन्होंने कानपुर देहात के शिवली में शोभन आश्रम का निर्माण कराया।

ब्रह्मलीन हुए श्री 1008 स्वामी विरक्तानंद जी महाराज को कानपुर ही नहीं आसपास के जिलों में शोभन सरकार के नाम से भक्त पुकारते थे। उनके तमाम भक्तों ने अपने वाहनों पर शोभन सरकार भी लिखवा रखा है। भक्त उन्हें सरकार का रूप मानते रहे तो स्वामी जी ने भी भक्तों के लिए अपनी हठधर्मिता को हथियार बनाया था। शोभन ही नहीं बल्कि उन्नाव, फतेहपुर और चित्रकूट में स्वामी जी ने न केवल मंदिरों की स्थापना की बल्कि समाज के उत्थान के लिए अनेकों कार्य किए।

फतेहपुर के दूधीकगार में बरसती थी कृपा

संतश्री शोभन सरकार का फतेहपुर में गंगा किनारे स्थित गुरु के आश्रम दूधीकगार से बेहद लगाव था। चौडगरा के समीप बक्सर पुल के इस पार गंगा किनारे स्थित दूधीकगार गांव गुरुओं की तपोस्थली है और गुरु समाधिस्थ हैं। उन्होंने आश्रम में गुरु स्वामी परमानंद जी महाराज और उनके गुरु स्वामी सतसंग की मूर्ति स्थापित कराई और हनुमानजी का भव्य मंदिर बनवाया। सदगुरु आश्रम जूनियर हाईस्कूल की स्थापना कराकर निश्शुल्क शिक्षा की व्यवस्था कराई। बक्सर में पुल बनने के बाद उन्नाव का बक्सर इलाका फतेहपुर से हाईवे से सीधे जुड़ गया। संतश्री ने दूधीकगार में झील का निर्माण कराया। प्रत्येक वर्ष यहां कार्तिक पूर्णिमा से आठ दिवसीय धार्मिक मेला लगता है और अटूट भंडारे में हजारों लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं।

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