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सरकारी सेवा की तैयारी करने वाले लोगों पर पुलिस केस का प्रभाव क्या होता है ?


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???? किसी भी व्यक्ति को किसी भी सरकारी सेवा में नियुक्त करने के पहले उसका पुलिस वेरिफिकेशन करवाया जाता है।
????ऐसे पुलिस वेरिफिकेशन में सबसे महत्वपूर्ण चीज यह देखी जाती है कि अभ्यार्थी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड है या नहीं।

✅किसी भी अभ्यार्थी पर बहुत अधिक आपराधिक प्रकरण नहीं होना चाहिए और कोई भी ऐसा प्रकरण नहीं होना चाहिए जिसमें 3 वर्षों से अधिक के कारावास का प्रावधान है, जो नैतिक अधमता जैसे मानव शरीर से संबंधित अपराध, संपत्ति से संबंधित अपराध और देश के विरुद्ध होने वाले अपराध से जुड़े न हो।

✅अगर किसी भी अभ्यर्थी पर किसी बड़े अपराध का जिसमें 3 वर्ष से अधिक की अवधि के कारावास की सजा का प्रावधान है, विचारण चल रहा है तब उसे सरकारी सेवा में नहीं लिया जा सकता।

✅अगर अभ्यार्थी पर ऐसा विचारण चल चुका है और उसे बाइज्जत बरी कर दिया गया है, तब उसे सरकारी सेवा में लिया जा सकता है, भले ही रिकॉर्ड पर उस अभ्यार्थी के मामले में यह दर्ज़ हो कि उस पर मुकदमा चला है।

✅आमतौर पर लोग छोटे मामलों में समझौता कर लेते हैं, अगर किसी अपराध में समझौते के माध्यम से बरी हुआ गया है, तब इस स्थिति में अभ्यार्थियों को सेवा में अवसर नहीं दिया जा सकता। क्योंकि समझौते के मामले में व्यक्ति बाइज्जत बरी नहीं होता है, बल्कि समझौते से भरी होता है।

✅बाइज्जत बरी होना उसे कहा जाता है जहां अभियोजन द्वारा मामला प्रमाणित नहीं किया गया है।

????जानकारी उपयोगी लगे तो बाक़ी लोगों को भी जानकारी !
जानकार बनिए ,
सबको जानकार बनाइए ,
क्यूंकि आप बढ़ेंगे – तो देश बढ़ेगा नितिन शाक्य नोडल अधिकारी की वाल से……

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