सचिवलय में लगा ताला, भटक रहे ग्रामीण

मिनी सचिवालय में ताला, झोले में गांव की पंचायत
अविक शुक्ला
तहसील बिंदकी संवाददाता
Global times 7news network,fatehpur
बिंदकी फतेहपुर । गांव के लोगों को आय, जाति या अन्य प्रमाणपत्र बनवाने के लिए तहसील या जिला मुख्यालय का चक्कर न लगाना पड़े, इसके लिए शासन ने हर ग्राम पंचायत में पंचायत भवन का निर्माण कराया है। प्रति पंचायत भवन पर 10 से 12 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। पंचायत सहायक भी नियुक्त किए गए हैं लेकिन इसका लाभ आम लोगों को नहीं मिल रहा है। हालत यह है कि अधिकतर पंचायत भवनों (मिनी सचिवालय) पर ताले लटक रहे हैं। ग्राम प्रधान अपने साथ झोले में मुहर और अन्य कागजात रखते हैं और जरूरत पड़ने पर किसी को प्रमाणपत्र जारी कर देते हैं।

सरकार की मंशा पंचायत भवन को मिनी सचिवालय के रूप में विकसित करना है, जहां ग्रामीणों की फरियाद सुनकर उनकी समस्याएं दूर की जा सकें। ग्राम पंचायत के कार्यों को आसान बनाने के लिए पंचायत सहायकों की नियुक्ति भी की गई। इसके बाद भी पंचायत भवनों की स्थिति यथावत ही है।
देवमई ब्लाक के भैसौली ग्राम पंचायत में बना सचिवालय लाखो की लागत की निधि पर पानी फेरता नजर आ रहा है । ताला लटकने से ग्रामीणों को अपनी समस्याओं के लिये भटक रहे हैं । सरकार द्वारा हर ग्राम पंचायत में जनता दर्सन कार्यक्रम भी नही हो रहे हैं । मकसद पूरा नहीं कर रहे गांवों में बने पंचायत भवन।
मिनी सचिवालय खुलने का उददेश्य पूरा नहीं कर पा रहे है। एक तो ज्यादातर भवनों में बैठने की स्थिति नहीं है। कहीं जर्जर भवन तो कहीं प्रधान और सचिवों की उदासीनता से हो गए कंडम। कई जगह निर्माणाधीन हैं। ऐसे में सदस्यों के साथ ग्रामीणों के काम भी नहीं हो पा रहे।
भवनो में पड़ा अधूरा कार्य पूरा न होने से बैठकें नहीं हो रही है । अधिकतर प्रधान घर से ही काम करते हैं। मनमानी योजनाएं बनाते हैं। इससे कई जगह आरोप-प्रत्यारोप लगते हैं। इससे सदस्यों, ग्रामीणों को उनके घर या कोसो दूर प्रधानों द्वारा बुलाये गए पतो पर जाना पड़ता है। इससे ज्यादातर महिला सदस्यों को दिक्कत होती है।






